प्रदेश में बिजली की कमी पर सरकार ने लिया संज्ञान

करीब दो दशक बाद ग्रामीणों को हुई बिजली नसीब

रायपुर | मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग हुए 19 साल हो गए जिसमें अब तक प्रदेश ने तीन सरकारों का राज देखा है। प्रदेश में अजीत जोगी की महज 3 साल ही समय दे पाई। इसके बाद जनता ने अजीत जोगी यानी कांग्रेस को नकार दिया। 2003 के बाद से 2018 तक भारतीय जनता पार्टी तीन बार सत्ता में रही यानी 15 साल तक भाजपा ने प्रदेश पर राज किया है। उसके बाद 2018 में कांग्रेस ने भाजपा को धता बताते हुए प्रदेश में अपनी सत्ता की कमान संभाली। इन 19 सालों में प्रदेश सरकार पूरे प्रदेश में आम जनता को बिजली मुहैया कराने के लिए कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ को बिजली का सरप्लस राज्य कहा जाता है छत्तीसगढ़ ने अब तक अपनी पहचान सर प्लस राज्य के रूप में ही बनाई है इसके बावजूद भी प्रदेश के कई क्षेत्र आज तक बिजली कनेक्शन से जुड़ नहीं पाया है यह सबसे बड़ी विडंबना मानी जा रही है। लेकिन आज भी लगभग 20 से 22 हजार घरों में बिजली नदारद है। पिछली सरकार यानी डॉक्टर रमन सिंह की सरकार ने दावा किया था कि 2018 तक पूरे प्रदेश में शत-प्रतिशत घरों में बिजली की लाइन पहुंचा दी जाएगी लेकिन यह हो नहीं पाया।

प्रदेश का 553 गांव बिजली से दूर
प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्र की बात करें तो जिसमें सबसे अधिक वनांचल क्षेत्र है जहां पर अभी भी कई जगहों पर बिजली नदारद है, यानी ग्रामीणों को आज भी अंधेरे में ही सभी काम निपटाने पड़ते हैं। जिसके लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। प्रदेश में लगभग ढाई करोड़ घरों में बिजली कनेक्शन पहुंचाने की योजना का लक्ष्य रखा गया था। जिनमें 553 गांव यानी 20,000 से ज्यादा परिवारों को अब तक बिजली नहीं पहुंच पाया है छत्तीसगढ़ में यदि आंकड़े की बात करें तो बीजापुर में लगभग 10254, सुकमा में 6943, नारायणपुर में 2250 और दंतेवाड़ा में 687 परिवार ऐसे हैं जिनको अब तक बिजली नहीं मिली है। इन घरों में बिजली नहीं पहुंचने का सबसे बड़ा कारण नक्सल क्षेत्र माना जा रहा है। जैसे कि सभी जानते हैं कि छत्तीसगढ़ का वनांचल क्षेत्र नक्सल से घिरा हुआ है, जिसमें नक्सलवादियों के मंसूबों के चलते अब तक छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल अंधेरे में डूबा हुआ है। जब भी पूर्ववर्ती सरकार द्वारा इन क्षेत्रों में बिजली के खंभों को लगाए जाने का प्रयास किया गया पर नक्सलियों ने इस मुकाम को रोकने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इसी डर के चलते माना जाता है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी क्षेत्रों में काम करना नहीं चाहता।

जकपूर को मिली बिजली की सौगात
नवंबर 2018 में नई सरकार यानी भूपेश बघेल की सरकार सत्ता में काबिज होने के बाद अब जाकर ऐसे वनांचलो में बिजली पहुंचाने की कवायद पुरजोर शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सरगुजा के वनांचल क्षेत्र जनकपुर में 174 गांव ऐसे हैं जहां बीते 19 सालों से अब तक ग्रामीणों ने बिजली की चकाचौंध नहीं देखी है। छत्तीसगढ़ के गांव के हजारों लोग बिजली की समस्या से लगातार जूझते आ रहे हैं और यह ग्रामीण कई बार पूर्ववर्ती सरकार को भी जनदर्शन के माध्यम से सजग भी किया था। लेकिन अब तक वहां बिजली नहीं पहुंच पाई थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस गांव की जानकारी मिली तो वे अपने विभाग के ही अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर इन गांव में बिजली यथासंभव पहुंचाने का दिशा निर्देश दिया था। अब जाकर जनकपुर के ग्रामीणों को बिजली की समस्या से निदान हो पाया है। भूपेश सरकार ने अपने 3 महीने के रिकार्ड समय में 60 किलोमीटर नई विद्युत लाइन बिछाकर इस गांव में बिजली पहुंचाने का इंतजाम कर दिया है। इससे पहले जनकपुर में मध्य प्रदेश से ही 33kv लाइन से विद्युत आपूर्ति की जा रही थी। जिसकी लंबाई 100 किलोमीटर है। इस क्षेत्र के गांव को ना तो सही तरीके से बिजली मिल पा रही थी और ना ही उपभोक्ताओं को वास्तविक वोल्टेज की बिजली उपलब्ध हो रही थी। यही कारण है की बिजली आए दिन यहां गुल हो जा रही थी। यहां तक कि जब बिजली में खराबी आती थी तब इन ग्रामीणों को अपने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के भरोसे रहना पड़ता था। आखिरकार मुख्यमंत्री के सजगता के बाद अब जनकपुर में विद्युत उपकेंद्र बनाकर जनकपुर के ग्रामीणों को स्थाई बिजली की सौगात राज्य सरकार ने दे दिया है। जनकपुर में ग्रामीणों को बिजली मिलने के बाद अब दूसरे क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी अब राज्य सरकार से आस जाग गई है कि उन्हें भी आने वाले समय में जल्द से जल्द बिजली की सौगात मिलेगी।