लैगिंक अपराधों से बच्चों को दूर रखने प्राध्यापकों को दी गई टिप्स

बालकों से संबधित कानूनों पर हुआ उन्मुखीकरण कार्यशाला

रायपुर | प्रदेश में बढ़ते लैंगिक अपराध पर नकेल कसने प्रशासन ने चुस्ती दिखाई है। जिला बाल संरक्षण समिति रायपुर द्वारा बच्चों के लैंगिक अपराध को रोकने कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस विषय पर रायपुर के शहीद स्मारक भवन में  “लैगिंक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम-2012 तथा बच्चों से संबधित कानूनों पर “ रखा गया था। इस एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में रायपुर जिले के कलेक्टर डाॅ. एस.भारतीदासन और जिले एसएसपी शेख आरिफ हुसैन और जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव उमेश उपाध्याय शामिल हुए। इसके साथ ही कार्यशाला में शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों के प्रधानपाठक और प्राचार्य सम्मिलित हुए। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग के श्री अशोक पांडे सहित अधिकारी -कर्मचारी उपस्थित थे।

बच्चो को सही दिशा देने दिया गया टिप्स
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर डाॅ. एस भारतीदासन कहा कि स्वयं पर अनुशासन बहुत आवश्यक है। लगातार बदल रहे सामाजिक तथा पारिवारिक वातावरण में बच्चों को सही दिशा दिखाना हम सभी की नैतिक जवाबदारी है। बालकों का संरक्षण अधिनियम-2012 कानून लैगिंक दुव्र्यवहार एवं शोषण से बच्चों के संरक्षण के लिए विधिक प्रावधानों को सशक्त करने के लिए लागू किया है। इस अधिनियम के तहत दोषी व्यक्ति को कठोर कारावास और जुर्माना से दंडित किया जा सकेगा।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शेख आरिफ हुसैन ने कहा कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में बच्चों का बचपन गुम सा हो गया है। यह एक गंभीर समस्या है। बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता है। वर्तमान इलेक्ट्राॅनिक दौर में तकनीकी प्रगति के साथ बच्चों को उचित संस्कार देना भी आवश्यक है। शिक्षक नियमित रूप से बच्चों का निरीक्षण करें तो यह संभव ही नहीं है कि बच्चें गलत दिशा में जा सके।

जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश उपाध्याय ने कहा कि किसी अपराध को छुपाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। समाज बदल रहा हैे, अपराध को छुपाने के बजाय उजागर करना हम सभी की नैतिक जवाबदारी हैं। यह कार्यशाला आप सभी को सतर्क और संवेदनशील बनाने के लिए आयोजित किया गया है।