Rath Yatra : पुरी मे निभाई जाएगी छेरा पहरा की रस्म

 पुरी के राजा महाराजा दिब्य सिंहदेब 4 बजे करेंगे छेरा पहरा

पुरी। तीर्थ नगरी पुरी श्रीमंदिर में पवित्र त्रिमूर्ति- भगवान बलभद्र, भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सुबह से ही, हजारों भक्त श्री मंदिर के नज़दीक महाप्रभु के दर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे है। श्रीमंदिर से जगत के नाथ स्वामी जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल रथों को गुंडिचा मंदिर तक खींचा जाएगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के कार्यक्रम के अनुसार, रथों को खींचने का कार्य शाम 4 बजे से शुरू होगा, जिसमें ‘छेरा पंहरा’ सहित अन्य अनुष्ठान पूरे होंगे।


पूरी के राजा करेंगे छेरापहरा
ओडिशा के राजा गजराज जो प्राचीन काल के राजा के वंशज हैं,गजपति नरेश महाराजा दिब्य सिंहदेब वह पालकी में बैठकर पूरे ऐश्वर्य और वाद्यों के साथ उनके महल से जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगे। श्री जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ आषाढ़ द्वितीया के दिन यानी आज दोपहर के पहले ही रथ पर विराजमान होंगे । उसके तुरंत बाद ही राजा पालकी में बैठकर मंदिर पहुंचंगे। सबसे पहले प्राचीन रिवाजों के अनुसार राजा पुरषोत्तम देव सोने का झाड़ू लेकर रथ के सामने जहां तीनों देव बैठे हैं उस स्थान को झाड़ू लगाएंगे। एक प्रकार से राजा होने के बाद भी वे अपना सेवक जगन्नाथ का मानते हैं और राजा का कर्तव्य होता है कि भगवान के सेवक के रूप में अपने प्रजा की सेवा करें। भगवान जगन्नाथ के सामने नतमस्तक होने का यह सुनहरा अवसर होता है। छेरपहरा इसी को ही कहते हैं। छेरापहरा को बुहारी भी कहा जाता है।

भगवन निकल रहे अपने असल रूप में दर्शन देने
भगवान जगन्नाथ ऐसे देवता है जो अपनी मूल विग्रह के साथ अपनी वेदी को छोड़कर अपने भक्तों का हाल चाल पूछने सबके बीच आते हैं। माना जाता है कि पूरे विश्व में भगवान जगन्नाथ ही ऐसे देव हैं जो स्वयं मंदिर से बाहर भक्तो को दर्शन देने अपने असली रूप में निकलते हैं। यह रथ यात्रा धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें भाग लेने और भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। आज भगवान जगन्नाथ को रथ पर सवार किया जा रहा है। भव्य यात्रा के साथ जगन्नाथ भगवान अपनी मौसी के घर के लिए रवाना होंगे। भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर गुंडिचा देवी का मंदिर है, जहां श्री जगन्नाथ भगवान हर साल एक सप्ताह रहने के लिए जाते हैं।