Big Breaking : बेटों और पतियों की मांगों के लिए हड़ताल में बैठेगा पुलिस परिवार

रायपुर। राजधानी में पुलिस परिवार 25 जून को धरना देने की तैयारी कर रही है। धरना स्थल पर इस प्रदर्शन के लिए पुलिस कर्मियों के परिजनों ने बकायदा अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा लिखित अनुमति भी ले ली है। अनुमति मांगने पुलिसकर्मियों के परिजनों ने तक़रीबन डेढ़ सौ परिवार के सदस्यों ने अपना हस्ताक्षरित पत्र एडीएम को सौपा था जिसपर एडीएम ने अनुमति प्रदान कर दी है। 25 जून को अब ये पुलिस परिवार धरना स्थल पर एक जुट होकर पुलिस कर्मियों के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करने की तैयारी में है। मिली जानकारी के मुताबिक परिवार के सभी सदस्य एक दिवसीय धरना प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के मार्फ़त मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने नाम ज्ञापन सौपेंगे।
इधर इस धरना-प्रदर्शन की अनुमति की खबर फैलते ही पुलिस मुख्यालय से लेकर प्रदेशभर में खलबली मची हुई है। मिली जानकारी के मुतबिक ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारी इस बाटी की पतासाजी करने में भी जुट गए है कि इस धरना की अगुवानी कौन कर रहा है ? और किन मांगों को लेकर पुलिस परिवार धरने का मन बना रहा है। परिजन पुलिसकर्मियों को वीकली ऑफ, अलावा बुलेट प्रूफ जैकेट, मकान, वाहन भत्ते और शिफ्ट में ड्यूटी जैसी मांगों को लेकर धरना देंगे।

जा चुके है हाईकोर्ट
भारतीय पुलिस व राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के यूनियन की तर्ज पर पुलिस यूनियन के गठन की कवायद करने वाले एक बर्खास्त आरक्षक राकेश यादव ने कोर्ट में 7 अक्टूबर 2015 को याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था, पुलिस के आला अफसर निचले तबके के पुलिस कर्मियों से दिन-रात काम तो लेते हैं, लेकिन इस दौरान इस बात का ख्याल नहीं रखा जाता है कि काम की अधिकता से पुलिसकर्मी का शरीर भी पस्त और अवसादग्रस्त हो सकता है। यादव का कहना था कि वीकली ऑफ नहीं मिलने से प्रदेश के पुलिसकर्मी रोग से ग्रसित होकर तनावपूर्ण जीवन जीने को मजबूर है।

कोर्ट ने दिया था आदेश
याचिकाकर्ता राकेश यादव की याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दिसंबर 2017 में सरकार को आदेश दिया था। जिसमें बिलासपुर हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल ने इस बारे में एक कमेटी गठित कर गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए थे। कमेटी में सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन, गृह और वित्त विभाग के सचिव और रायपुर पुलिस अधीक्षक को नामित किया गया था। कमेटी के सदस्य राज्य के पुलिसकर्मियों से बातचीत और सुझाव के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सरकार और न्यायालय को सौपन था मगर ऐसा नहीं हो सका।