चरणदास चोर नाटक मंचन के साथ शुरू हुई “रंग रचना”

"रंग रचना" में 4 दिनों तक 6 नाटकों का होगा मंचन

रायपुर। राजधानी के रंगमन्दिर में छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी द्वारा रंगरचना का आयोजन किया गया। रंगरचना के माध्यम से चार दिनों तक लगातार नाटकों का मंचन कीया जाएगा।

Charandas Chor                 इस समारोह में कुल 6 नाटकों का मंचन किया जाएगा। शुभारंभ अवसर पर हबीब तनवीर के प्रसिद्ध नाटक चरणदास चोर का मंचन किया गया। जिसमें चोर की भूमिका में क्रांति दीक्षित ने अपने अभिनय की छाप छोड़ते हुए दर्शको से काफी वाहवाही लूटी। चरणदास चोर एक शिक्षाप्रद कहानी पर आधारित है। लगभग डेढ़ घंटे तक चले नाटक में हास्य के अलावा छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़ी सुआ,कर्मा,ददरिया और पंथी नृत्य का समावेश किया गया।

चरणदास को मिली सच बोलने की सजा
चरणदास चोर को सच बोलने की सजा के तौर पर रानी दाई फांसी की सजा सुना देती है। चरणदास चोर को उसके गुरु के द्वारा पांच वचन दिया जाता है जिसके कारण वह कभी झूठ नही बोलता। यहां तक कि रानी जब चरणदास की सरलता से प्रभावित होकर शादी करने की इच्छा जताती है तो उसे भी चरणदास ठुकरा देता है। इसीसे नाराज होकर रानी उसे फांसी पर लटका देती है। नाटक को छत्तीसगढ़ी में प्रस्तुत किया गया। नाटक के प्रस्तुति के दौरान दर्शक चोर के अभिनय से लोटपोट भी हुए।

हबीब तनवीर की अमिट छाप आज भी जीवित
चरणदास चोर प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर द्वारा रचित पटकथा है। चरणदस चोर नाटक विदेशों में भी काफी चर्चित है नाटककार हबीब तनवीर अपनी टीम को लेकर कई विदेश दौरा किए, जहां पर चरणदास चोर के नाटक का मंचन किया गया और दर्शकों ने इस नाटक को काफी सराहा। वर्ष1982 की बात करें तो एडिनबर्ग में इंटरनेशनल ड्रामा फेस्टिवल में इस नाटक का मंचन किया गया था। जिसमें हबीब तनवीर ने अवार्ड भी हासिल किया। सबसे बड़ी बात कि यह नाटक देश का पहला नाटक है जो फेस्टिवल में अवॉर्ड हासिल किया है। आज हबीब तनवीर इस दुनिया में नहीं है लेकिन आज भी चरणदास चोर के जामा के चलते हबीब तनवीर सभी रंगकर्मी दर्शकों और कलाकारों के बीच जीवित है